लहसुनिया (Cat’s Eye) केतु का रत्न है। यह अचानक आने वाली समस्याओं से बचाता है, व्यापार में लाभ देता है और आपकी अंतरात्मा (intuition) को तेज करता है। इसे आमतौर पर शनिवार को दाएं हाथ की मध्यमा (Middle Finger) या अनामिका (Ring Finger) में पहनना सबसे अच्छा माना जाता है।
लहसुनिया रत्न, जिसे कैट्स आई (cat’s eye stone) के नाम से भी जाना जाता है, एक अद्वितीय और शक्तिशाली रत्न माना जाता है। यह रत्न केतु ग्रह से जुड़ा हुआ है और ज्योतिष में इसका विशेष महत्व है। लहसुनिया रत्न धारण करने से जीवन में आने वाली अनचाही परेशानियों और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है। इसे पहनने से केतु ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का अनुभव होता है।
लहसुनिया रत्न का रंग आमतौर पर धूमिल या हल्के पीले रंग का होता है, जिसमें एक बिल्लौरी आभा दिखाई देती है, जो इसे बिल्ले की आँख जैसा दिखाती है। यही कारण है कि इसे “कैट्स आई” कहा जाता है। इस रत्न को धारण करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। यह रत्न विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, जो रहस्यमय या गूढ़ विषयों में रुचि रखते हैं, जैसे तंत्र-मंत्र, आध्यात्मिक साधनाएं और गहन अनुसंधान।
लहसुनिया रत्न आर्थिक समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायक होता है, विशेषकर उन स्थितियों में जब किसी को अचानक से आर्थिक नुकसान या धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा हो। लहसुनिया पत्थर के फायदे अंगिनात हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानेंगे लहसुनिया रत्न के फायदे, इसे धारण करने की सही विधि, या लहसुनिया पत्थर कोनसी उंगली मैं पहनना चाहिए.
लहसुनिया रत्न के फायदे

लहसुनिया रत्न एक प्रकार का क्वार्ट्ज़ है जो अपने हल्के बैंगनी रंग के लिए जाना जाता है। इसका नाम इसके रंग से आया है, जो लहसुन के छिलके के समान होता है। यह रत्न भारत में काफी लोकप्रिय है और इसे ज्योतिष में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। आइए जानते हैं लहसुनिया रत्न के फायदे (lehsunia stone benefits in hindi) के बारे में मुख्य विस्तार से!
लहसुनिया रत्न के मुख्य फायदे
मानसिक शांति: लहसुनिया रत्न मन को शांत करने में सहायक माना जाता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है।
आत्मविश्वास बढ़ाना: इस रत्न को पहनने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह अपने आप पर भरोसा करने और नई चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है।]
रचनात्मकता को बढ़ावा: लहसुनिया पत्थर कलाकारों और रचनात्मक पेशेवरों के लिए विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। यह नए विचारों और प्रेरणा को प्रोत्साहित करता है।
आध्यात्मिक विकास: यह रत्न आध्यात्मिक जागरूकता और आंतरिक ज्ञान को बढ़ाने में सहायक होता है। यह ध्यान और योग के अभ्यास में सहायक हो सकता है।
संचार कौशल में सुधार: लहसुनिया रत्न को पहनने से व्यक्ति की वाक्पटुता और संचार क्षमता में सुधार होता है। यह सार्वजनिक बोलने और प्रस्तुतिकरण में आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद कर सकता है।
लहसुनिया पत्थर के स्वास्थ्य लाभ
पाचन में सुधार: लहसुनिया रत्न (cat’s eye gemstone) को पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में मददगार माना जाता है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
रक्त शुद्धिकरण: यह रत्न रक्त को शुद्ध करने और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना: लहसुनिया स्टोन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक होता है, जिससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
त्वचा स्वास्थ्य: इस रत्न को त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने में प्रभावी माना जाता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकता है।
नींद की गुणवत्ता में सुधार: लहसुनिया पत्थर को रात में सिरहाने के पास रखने से बेहतर नींद आने में मदद मिल सकती है।
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लहसुनिया रत्न का ज्योतिषीय महत्व
लहसुनिया रत्न को भारतीय ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है। यह रत्न राहु ग्रह से संबंधित माना जाता है। राहु एक छाया ग्रह है जो व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। लहसुनिया रत्न पहनने से राहु के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है और इसके सकारात्मक पहलुओं को बढ़ाया जा सकता है।
कैरियर में उन्नति: ज्योतिष के अनुसार, लहसुनिया रत्न पहनने से कैरियर में उन्नति की संभावना बढ़ जाती है। यह नौकरी में पदोन्नति या व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने में सहायक हो सकता है।
वित्तीय स्थिरता: यह रत्न वित्तीय मामलों में स्थिरता लाने में मदद करता है। यह अचानक धन लाभ या निवेश में सफलता प्रदान कर सकता है।
शत्रुओं पर विजय: लहसुनिया पत्थर को शत्रुओं और प्रतिद्वंद्वियों पर विजय पाने में सहायक माना जाता है। यह व्यक्ति को मानसिक शक्ति और दृढ़ता प्रदान करता है।
विवाह और रिश्ते: यह रत्न वैवाहिक जीवन में सुख-शांति लाने में मदद करता है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और समझ को बढ़ाता है।
लहसुनिया रत्न के नुकसान

लहसुनिया (कैट्स आई) एक लोकप्रिय रत्न है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में शुभ माना जाता है। यह रत्न ग्रह केतु से जुड़ा होता है और माना जाता है कि यह कई तरह के दोषों को दूर करने में सहायक होता है। हालांकि, लहसुनिया के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।
लहसुनिया के संभावित नुकसान
अनुकूलता का अभाव: लहसुनिया हर व्यक्ति के लिए अनुकूल नहीं होता। अगर आपकी कुंडली में केतु कमजोर या अशुभ स्थिति में है, तो लहसुनिया पहनने से नुकसान हो सकता है। इसलिए, लहसुनिया पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना जरूरी है।
शारीरिक समस्याएं: कुछ लोगों को लहसुनिया पहनने से त्वचा पर रैशेज, खुजली या अन्य प्रकार की एलर्जी हो सकती है। इसके अलावा, कुछ लोगों को सिरदर्द, नींद न आना या चिंता जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
मानसिक प्रभाव: लहसुनिया पहनने से कुछ लोगों में अत्यधिक चिंता, डर या भय पैदा हो सकता है। यह रत्न व्यक्ति को अकेला और उदास महसूस करा सकता है।
आर्थिक नुकसान: कुछ मामलों में, लहसुनिया पहनने से व्यक्ति को आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। यह रत्न व्यक्ति को गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर सकता है।
दुर्घटना का खतरा: कुछ मान्यताओं के अनुसार, लहसुनिया पहनने से व्यक्ति को दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
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लहसुनिया रत्न किस उंगली में पहने
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लहसुनिया रत्न को धारण करने के लिए दाहिने हाथ की मध्यमा (मिडिल फिंगर) सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मध्यमा उंगली शनि ग्रह से जुड़ी होती है, और शनि और केतु ग्रहों का एक-दूसरे से गहरा संबंध है। मध्यमा उंगली में इस रत्न को धारण करने से केतु के शुभ प्रभावों में वृद्धि होती है और इसके अशुभ प्रभाव कम होते हैं। यह उंगली संतुलन और न्याय का प्रतीक है, जो लहसुनिया रत्न के लाभकारी प्रभावों को और बढ़ा देती है।
लहसुनिया रत्न उन लोगों को धारण करना चाहिए जिनकी कुंडली में केतु ग्रह अशुभ स्थिति में होता है। विशेष रूप से जिन लोगों को मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याएं या अज्ञात भय परेशान कर रहे हों, वे इसे धारण कर सकते हैं।
याद रखें कि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रत्न आपके लिए अनुकूल है।
लहसुनिया कब और कैसे धारण करें?

इस रत्न को धारण करने के लिए सही समय और तरीके का पालन करना महत्वपूर्ण है। आइए विस्तार से जानें कि लहसुनिया कब और कैसे धारण करना चाहिए।
लहसुनिया धारण करने का उचित समय
ग्रह स्थिति: लहसुनिया केतु ग्रह से संबंधित है। इसलिए, केतु की अनुकूल दशा में इसे धारण करना लाभदायक होता है।
नक्षत्र: अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र में लहसुनिया धारण करना शुभ माना जाता है।
तिथि: शुक्ल पक्ष की द्वितीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियों को लहसुनिया धारण करना उत्तम होता है।
दिन: गुरुवार को लहसुनिया धारण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
समय: सूर्योदय के बाद प्रातः काल में लहसुनिया धारण करना सर्वोत्तम होता है।
लहसुनिया धारण करने की विधि
शुद्धिकरण:
लहसुनिया को पहले गंगाजल या शुद्ध जल से धोएं।
फिर इसे कच्चे दूध में कुछ देर के लिए डुबोकर रखें।
इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गन्ने का रस) से स्नान कराएं।
मंत्र जाप:
लहसुनिया को धारण करने से पहले निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ॐ ह्रीं क्षीं श्रीं केतवे नमः”
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अंगूठी में जड़ना:
लहसुनिया को चांदी की अंगूठी में जड़वाएं।
अंगूठी का वजन कम से कम 3 ग्राम होना चाहिए।
धारण करना:
लहसुनिया की अंगूठी को दाहिने हाथ की मध्यमा (मध्य) उंगली में पहनें।
प्राण-प्रतिष्ठा:
अंगूठी पहनने के बाद, रत्न पर कुछ बूंदें गंगाजल की छिड़कें।
फिर इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः केतवे नमः”
दान:
लहसुनिया धारण करने के बाद, अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें।
सावधानियां
लहसुनिया धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
केवल प्रामाणिक और दोष-रहित लहसुनिया ही धारण करें।
यदि लहसुनिया धारण करने के बाद कोई नकारात्मक प्रभाव महसूस हो, तो तुरंत इसे उतार दें और विशेषज्ञ की सलाह लें।
लहसुनिया को हमेशा साफ रखें और समय-समय पर इसकी सफाई करते रहें।
लहसुनिया कितने रत्ती का पहने
लहसुनिया (लेहसुनिया) को केतु का रत्न माना जाता है और ज्योतिष शास्त्र में इसे कई लाभकारी गुणों से युक्त बताया गया है। यह रत्न धारण करने से पहले इसकी सही मात्रा और धारण करने की विधि जानना बहुत जरूरी है।
लहसुनिया की सही मात्रा:
आमतौर पर 3, 5 या 7 रत्ती: ज्योतिषियों के अनुसार, लहसुनिया को 3, 5 या 7 रत्ती का ही धारण करना चाहिए।
2, 4, 11 और 13 रत्ती से बचें: मान्यता है कि 2, 4, 11 और 13 रत्ती का लहसुनिया अशुभ फलदायी हो सकता है।
कैरेट में: यदि आप कैरेट में लहसुनिया खरीद रहे हैं तो लगभग 0.6 से 1.4 कैरेट का लहसुनिया उपयुक्त माना जाता है।
नकली लहसुनिया की पहचान:
फाइबर ऑप्टिक ग्लास में बहुत सही रेखा होती है जो प्राकृतिक नहीं दिखती। असली लहसुनिया में सूक्ष्म गहराई होती है और रेखा पत्थर के अंदर तैरती है। कांच कृत्रिम दिखता है।
असली क्रिसोबेरिल अत्यंत कठोर है। यह क्वार्ट्ज को खरोंच सकता है। कांच नरम है।
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किन राशि वालों को पहनना चाहिए लहसुनिया रत्न?
लहसुनिया रत्न, जिसे कैट्स आई स्टोन के नाम से भी जाना जाता है, रत्न शास्त्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यह राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस रत्न को धारण करने से जीवन में आने वाली कई चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलती है। खासकर वे लोग जिनकी कुंडली में राहु या केतु से संबंधित समस्याएं होती हैं, उन्हें लहसुनिया रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।
कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों के लिए लहसुनिया रत्न शुभ माना जाता है। यह रत्न उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और राहु के अशुभ प्रभाव को कम करता है। कर्क राशि वाले लोग लहसुनिया धारण करने से मानसिक शांति, सुरक्षा, और सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों को लहसुनिया धारण करने से जीवन में आने वाले कष्टों और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। यह रत्न उनके करियर और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। राहु के कारण उत्पन्न होने वाले भ्रम और मानसिक तनाव से यह उन्हें मुक्त करता है।
मेष राशि: मेष राशि के लिए लहसुनिया धारण करना तब फायदेमंद होता है जब कुंडली में राहु या केतु के अशुभ योग हों। यह रत्न उनकी आत्मविश्वास में वृद्धि करता है और जीवन में स्थिरता लाने में मदद करता है।
वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक लहसुनिया रत्न से लाभान्वित होते हैं। यह उन्हें राहु के बुरे प्रभावों से बचाने में मदद करता है और जीवन में आने वाली अनचाही समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। विशेष रूप से तब जब जीवन में अचानक आर्थिक या व्यक्तिगत संकट उत्पन्न हो, लहसुनिया रत्न उनकी रक्षा करता है।
लहसुनिया रत्न किसको धारण नहीं करना चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए यह लहसुनिया रत्न शुभ नहीं होता। कुछ लोगों को इसे धारण करने से बचना चाहिए।
कुंडली में केतु की स्थिति:
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु पहले, चौथे, सातवें, दसवें या बारहवें भाव में बैठा हो तो उन्हें लहसुनिया रत्न धारण नहीं करना चाहिए।
केतु इन भावों में होने पर लहसुनिया रत्न के दुष्प्रभाव बढ़ सकते हैं।
दूसरे ग्रहों का प्रभाव:
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अन्य ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव हो तो लहसुनिया रत्न पहनने से पहले ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य समस्याएं:
जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो, उन्हें लहसुनिया रत्न धारण करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
व्यक्तिगत अनुभव:
कुछ लोगों को लहसुनिया रत्न पहनने से असहजता महसूस हो सकती है। ऐसे में इसे धारण करने से बचना चाहिए।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
लहसुनिया रत्न के क्या फायदे हैं?
छिपे दुश्मनों से रक्षा, काले जादू से सुरक्षा, व्यावसायिक सूझबूझ बढ़ाना, अचानक धन लाभ, अंतर्ज्ञान तेज करना, जोखिम भरे उपक्रमों में सुरक्षा, आध्यात्मिक विकास, केतु संबंधी समस्याओं को कम करना, और कर्मिक अवसाद पर काबू पाना।
क्या कोई भी लहसुनिया पहन सकता है?
जरूरी नहीं। वैदिक ज्योतिष में लहसुनिया केवल ज्योतिषी के परामर्श के बाद ही पहनना चाहिए। केतु एक शक्तिशाली छाया ग्रह है—यदि यह आपकी कुंडली में खराब स्थिति में है, तो लहसुनिया समस्याएं पैदा कर सकता है। तीन दिन के लिए आज़माएं और प्रभावों का निरीक्षण करें।
लहसुनिया किस उंगली में पहनना चाहिए?
दाहिने हाथ की मध्यमा (बीच की) उंगली में। ब्रेसलेट के लिए, बायां हाथ सुरक्षा और आंतरिक मार्गदर्शन के लिए उपयुक्त है।
असली लहसुनिया की पहचान कैसे करें?
असली क्रिसोबेरिल लहसुनिया में तेज, स्पष्ट रेखा होती है जो सहजता से चलती है, शहद से हरा-पीला रंग होता है, अत्यंत कठोर (8.5 मोह) होता है, और महंगा होता है (₹5,000+ न्यूनतम)। कैट्स आई क्वार्ट्ज सस्ता, नरम, सामान्यतः धूसर होता है।
लहसुनिया और टाइगर आई में क्या अंतर है?
पूरी तरह से अलग पत्थर। लहसुनिया क्रिसोबेरिल है जिसमें तेज एकल रेखा होती है। टाइगर आई क्वार्ट्ज है जिसमें सुनहरे-भूरे बैंड और चमक होती है। ज्योतिषीय उद्देश्यों के लिए ये परस्पर बदलने योग्य नहीं हैं।