9 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, नुकसान, धारण करने के नियम

9 मुखी रुद्राक्ष नवदुर्गा के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और यह धारक को साहस, आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती और निर्णय क्षमता प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा विश्वास है कि जो व्यक्ति जीवन में बार-बार डर, तनाव, अस्थिरता या मानसिक उलझनों का सामना कर रहा हो, उसके लिए 9 मुखी रुद्राक्ष बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है। वहीं, हर शक्तिशाली रुद्राक्ष की तरह इसके कुछ नुकसान या दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, खासकर तब जब इसे गलत तरीके से, गलत गुरु मंत्र के बिना या बिना उचित नियमों का पालन किए पहन लिया जाए।

इसलिए, 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करते समय शुद्धता, विधि-विधान और सही दिन-तिथि का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। इसे कैसे पहनें, किन लोगों पर इसका सर्वोत्तम प्रभाव पड़ता है, और किन स्थितियों में इसे धारण करने से बचना चाहिए – इन सभी बातों की जानकारी हर व्यक्ति को पहले से होना चाहिए। यह परिचय आपको 9 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, नुकसान और सही धारण नियमों को गहराई से समझने में मदद करेगा, ताकि आप इसे जीवन में संतुलन और सफलता प्राप्त करने के लिए सही रूप में अपना सकें।

9 मुखी रुद्राक्ष का ज्योतिषीय महत्व

नवमुखी रुद्राक्ष (9 Mukhi Rudraksha) को ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शक्तिशाली और दुर्लभ माना जाता है। यह माँ दुर्गा की नौ शक्तियों (नवदुर्गा) का प्रतीक है तथा भैरव बाबा और कौड़ों के देवता कपिल मुनि से भी जुड़ा हुआ है। ज्योतिष के अनुसार यह रुद्राक्ष केतु ग्रह और राहु के दुष्प्रभाव को शांत करने में सबसे प्रभावशाली माना जाता है।

मुख्य ज्योतिषीय लाभ:

  • केतु दोष, राहु-केतु की महादशा/अंतर्दशा में अद्भुत शांति प्रदान करता है।
  • कुंडली में सर्प दोष या कालसर्प दोष होने पर विशेष लाभकारी।
  • व्यक्ति में आत्मविश्वास, निर्णय शक्ति और नेतृत्व क्षमता का विकास करता है।
  • भय, तनाव, डर, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाता है।
  • मंगल और केतु के अशुभ योग में भी संतुलन लाता है।

यह रुद्राक्ष नौ मुख वाला होने से नौ ग्रहों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। खासकर जिन जातकों की कुंडली में केतु कमजोर या पीड़ित हो, उन्हें 9 मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए। इसे सोने या चाँदी में मढ़वाकर गले या दाहिने हाथ में धारण करने से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है।

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9 मुखी रुद्राक्ष के फायदे

9 मुखी रुद्राक्ष को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। यह रुद्राक्ष भगवान नवदुर्गा और देवी दुर्गा के प्रतीक माना जाता है तथा इसके धारण करने से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार आता है। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 9 मुखी रुद्राक्ष शनि ग्रह के प्रभाव को शांत करता है और जीवन में आने वाली बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा तथा दुर्भाग्य को दूर करने में सहायक होता है। यह रुद्राक्ष विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो तनाव, चिंता, या मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं। इसके धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और जीवन में सफलता के नए द्वार खुलते हैं। 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, 9 मुखी रुद्राक्ष में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हृदय गति को स्थिर करते हैं और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संतुलित करके मानसिक एकाग्रता और ध्यान की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में, जहां तनाव और चिंता जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं, 9 मुखी रुद्राक्ष एक प्राकृतिक और आध्यात्मिक समाधान के रूप में उभरा है। यदि आप शांति, स्थिरता और सफलता की तलाश में हैं, तो 9 मुखी रुद्राक्ष आपके लिए एक आशीर्वाद साबित हो सकता है।

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9 मुखी रुद्राक्ष के नुकसान

मुखी रुद्राक्ष को देवी दुर्गा का साक्षात् रूप माना जाता है और यह नवदुर्गा की शक्तियों से भरपूर होता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह रुद्राक्ष पहनने वाले को शक्ति, साहस, भय से मुक्ति, भौतिक सुख, और मोक्ष प्रदान करता है। इसे केतु ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

9 मुखी रुद्राक्ष के कथित “नुकसान” या दुष्प्रभाव

वास्तव में, 9 मुखी रुद्राक्ष का कोई सीधा और गंभीर नुकसान नहीं होता है। यह एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली मनका है। हालांकि, इसे धारण करते समय कुछ सावधानियां बरतना ज़रूरी है, जिन्हें लोग अक्सर “नुकसान” या “दुष्प्रभाव” समझ लेते हैं:

अशुद्धता में धारण करना: रुद्राक्ष को एक पवित्र वस्तु माना जाता है। यदि इसे अशुद्धता (जैसे मांस, शराब का सेवन, या दाह संस्कार में शामिल होने) की स्थिति में पहना जाता है, तो इसकी सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है, या यह वांछित परिणाम नहीं देगा। यह रुद्राक्ष का नुकसान नहीं, बल्कि धारण करने के नियमों का उल्लंघन है।

बिना प्राण-प्रतिष्ठा के पहनना: रुद्राक्ष को धारण करने से पहले विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा कराना आवश्यक है। बिना सक्रिय किए इसे पहनने से यह अपनी पूरी शक्ति से काम नहीं कर पाता।

गलत मंत्र का जाप: 9 मुखी रुद्राक्ष के लिए “ॐ ह्रीं हुं नमः” या “ॐ नमः शिवाय” जैसे मंत्रों का जाप करना चाहिए। गलत मंत्र का जाप इसकी ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।

शारीरिक परिवर्तन: यह रुद्राक्ष बहुत शक्तिशाली ऊर्जा प्रवाहित करता है। कुछ लोग शुरुआत में इसकी तीव्र ऊर्जा के कारण थोड़ा अशांत या अधिक सक्रिय महसूस कर सकते हैं, जिसे वे अस्थायी रूप से असहजता मान सकते हैं। यह कोई नुकसान नहीं है, बल्कि ऊर्जा के समायोजन की प्रक्रिया है।

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9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के नियम

सर्वोत्तम दिन: नौ मुखी रुद्राक्ष को मंगलवार या शुक्रवार के दिन धारण करना सबसे शुभ माना जाता है। नवरात्रि के दौरान इसे धारण करना विशेष फलदायी होता है।

उत्तम समय: प्रातःकाल सूर्योदय के समय, स्नान के पश्चात् इसे धारण करना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में धारण करना सर्वश्रेष्ठ रहता है।

शुभ तिथि: शुक्ल पक्ष की किसी भी तिथि को, विशेषकर पूर्णिमा या अष्टमी के दिन धारण करें।

किसे धारण करना चाहिए

नौ मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से इन लोगों के लिए लाभकारी है:

  • जिनकी कुंडली में केतु ग्रह अशुभ स्थिति में हो
  • जो अत्यधिक भय, चिंता या मानसिक अशांति से पीड़ित हों
  • व्यापारी, उद्यमी और नेतृत्व पद पर कार्यरत व्यक्ति
  • जिन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होती हो
  • माँ दुर्गा के उपासक और शक्ति साधना करने वाले साधक

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धारण करने की विधि और नियम

शुद्धिकरण प्रक्रिया: सबसे पहले रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध और शहद के मिश्रण में रात भर भिगोकर रखें। प्रातःकाल साफ जल से धोकर सुखा लें।

प्राण प्रतिष्ठा: रुद्राक्ष को लाल या काले धागे में पिरोएं। फिर शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थान पर रखकर धूप-दीप से पूजन करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

धारण विधि: गले में या हाथ में धारण करने से पूर्व इस मंत्र का उच्चारण करें: “ॐ ह्रीं हुं नमः”। इसे गले में माला के रूप में या दाहिने हाथ में कलाई पर पहन सकते हैं।

आवश्यक सावधानियां

  • रुद्राक्ष को मांस-मदिरा के सेवन के समय उतार दें
  • स्नान के समय पहने रह सकते हैं, लेकिन साबुन का सीधा संपर्क न होने दें
  • पूर्णिमा के दिन गंगाजल से शुद्ध करते रहें
  • रात्रि में शयन करते समय पहने रह सकते हैं
  • श्मशान या अशुद्ध स्थानों पर जाते समय उतार लें

नौ मुखी रुद्राक्ष के लाभ

नियमित धारण से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि, व्यापार में सफलता और शत्रुओं से रक्षा होती है। यह धारक को माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त कराता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

निष्कर्ष: नौ मुखी रुद्राक्ष एक दिव्य आध्यात्मिक साधन है। सही विधि और श्रद्धा के साथ धारण करने पर यह जीवन में अद्भुत परिवर्तन लाता है।

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Written By pmkkgems

Muskan Sain is a well-versed gemstone expert with over 8 years of experience in the field. She has received extensive training from a renowned gemological institute, which has equipped her with comprehensive knowledge and expertise in the identification, grading, and valuation of gemstones.

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