8 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, नुकसान, धारण करने के नियम

8 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, नुकसान और धारण करने के नियम को समझना हर साधक के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रुद्राक्ष बुद्धि, संतुलन और बाधा-नाशक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह रुद्राक्ष भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है, इसलिए इसे धारण करने वाला व्यक्ति मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और निर्णय-क्षमता में अद्भुत सुधार अनुभव कर सकता है। जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटें, करियर में अस्थिरता या मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए 8 मुखी रुद्राक्ष एक शक्तिशाली आध्यात्मिक उपकरण के रूप में कार्य करता है। माना जाता है कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, भय को कम करता है और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करता है।

हालाँकि, हर रुद्राक्ष की तरह 8 मुखी रुद्राक्ष के भी कुछ सावधानियाँ और संभावित नुकसान हो सकते हैं—जैसे गलत ऊर्जा संतुलन, अनियमित पहनना या अपवित्र स्थिति में धारण करने से लाभ कम हो सकता है। इसलिए इसके सही नियम, विधि और शुद्धिकरण प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इस ब्लॉग में आप जानेंगे 8 मुखी रुद्राक्ष के प्रमुख लाभ, इसके संभावित दुष्प्रभाव और इसे धारण करने के सही, शास्त्रीय और व्यावहारिक नियम, ताकि आप इसे अधिकतम सकारात्मक परिणामों के साथ पहन सकें।

8 मुखी रुद्राक्ष का ज्योतिषीय महत्व

8 मुखी रुद्राक्ष भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है, जो सभी विघ्नों को दूर करने वाले प्रथम पूज्य हैं। ज्योतिष शास्त्र में आठ मुखी रुद्राक्ष को अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारिक फलदायी माना गया है। यह रुद्राक्ष राहु ग्रह के दुष्प्रभावों को शांत करता है तथा कुंडली में राहु दोष, कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में विशेष रूप से प्रभावी है।

यह रुद्राक्ष पहनने वाले को बुद्धि, विवेक, निर्णय शक्ति और नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है। व्यापार, नौकरी और करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं तथा अप्रत्याशित सफलता मिलती है। विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने में यह अद्भुत कार्य करता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह कमर दर्द, गठिया, सांस संबंधी रोग और मानसिक तनाव से राहत देता है।ज्योतिषियों के अनुसार 8 मुखी रुद्राक्ष बुधवार या शनिवार को गंगा जल से अभिमंत्रित करके चांदी की चेन या रेशमी धागे में गले में धारण करना चाहिए। 

इसे धारण करने से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मूल नेपाल का 8 मुखी रुद्राक्ष सबसे उत्तम माना जाता है।यदि आप राहु के प्रकोप से परेशान हैं या जीवन में बार-बार असफलता मिल रही है, तो 8 मुखी रुद्राक्ष आपके लिए वरदान सिद्ध हो सकता है। लैब सर्टिफाइड और अभिमंत्रित रुद्राक्ष ही धारण करें।

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8 मुखी रुद्राक्ष के फायदे

8 मुखी रुद्राक्ष, जिसे भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) का प्रतीक माना जाता है, वैदिक परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शक्तिशाली और लाभदायक माना जाता है। यह रुद्राक्ष न केवल आध्यात्मिक उन्नति में सहायता करता है, बल्कि शारीरिक एवं मानसिक स्वास््थ्य को भी संतुलित रखता है। 

आज के तनाव भरे जीवन में 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को आत्मविश्वास, धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। यह ग्रह दोषों, विशेषकर केतु के प्रभाव को शांत करने में भी सहायक माना जाता है।

वैज्ञानिक रूप से भी, 8 मुखी रुद्राक्ष में पाए जाने वाले चुंबकीय गुण तंत्रिका तंत्र को स्थिर करके मानसिक शांति प्रदान करते हैं। इसे नियमित रूप से धारण करने से तनाव, चिंता, अनिद्रा और हृदय रोगों का खतरा कम होता है। साथ ही, यह व्यक्ति के भाग्य को उज्ज्वल बनाकर करियर व्यापार में सफलता दिलाने में भी मददगार साबित होता है। 

अगर आप अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, स्थिरता और आंतरिक शांति चाहते हैं, तो 8 मुखी रुद्राक्ष एक आदर्श आध्यात्मिक उपाय है। इस प्राकृतिक रत्न के लाभों को पाने के लिए इसे सही विधि से धारण करना अत्यंत आवश्यक है। यहाँ हम विस्तार से जानेंगे कि 8 मुखी रुद्राक्ष के फायदे क्या हैं, इसे कैसे पहनें और इसकी शुद्धि व पूजन विधि क्या होनी चाहिए।

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8 मुखी रुद्राक्ष के नुकसान

वास्तव में, प्राकृतिक 8 मुखी रुद्राक्ष से कोई सीधा या गंभीर नुकसान नहीं होता है। इसके तथाकथित ‘नुकसान’ या नकारात्मक प्रभाव अक्सर कुछ गलतियों या परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होते हैं, न कि स्वयं रुद्राक्ष के कारण।

8 मुखी रुद्राक्ष से जुड़ी संभावित नकारात्मकता:

गलत तरीके से धारण करना: बिना शुद्धिकरण (Shuddhikaran) और उचित प्राण-प्रतिष्ठा के रुद्राक्ष पहनना फलदायी नहीं होता और कभी-कभी अपेक्षित लाभ नहीं देता।

अशुद्धता बनाए रखना: रुद्राक्ष धारण करके शारीरिक अशुद्धता (जैसे अंतिम संस्कार में जाना, बच्चे के जन्म के दौरान), मांसाहार या मदिरा का सेवन करना इसके सकारात्मक प्रभावों को कम कर सकता है और मानसिक अशांति दे सकता है।

अविश्वसनीय स्रोत से खरीदना: नकली रुद्राक्ष (Nakli Rudraksha) या दोषपूर्ण/टूटे हुए मनके को पहनने से कोई लाभ नहीं होता और यह केवल निराशा ही देता है।

अति आत्मविश्वास: कुछ लोग रुद्राक्ष के भरोसे कर्म करना छोड़ देते हैं, जिससे उन्हें जीवन में असफलता मिलती है। यह रुद्राक्ष का नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्मों (Karma) का दोष है।

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निष्कर्ष और सावधानियां

8 मुखी रुद्राक्ष को यदि सही विधि (Vidhi) और पूर्ण विश्वास के साथ धारण किया जाए, तो यह हमेशा लाभकारी ही सिद्ध होता है। नकारात्मक परिणामों से बचने के लिए, इसे पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या धार्मिक गुरु से सलाह लेना और सभी नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

8 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के नियम

8 मुखी रुद्राक्ष भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है और यह विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है। यह रुद्राक्ष बुद्धि, सफलता और समृद्धि प्रदान करने के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसे धारण करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

किसे धारण करना चाहिए?

8 मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो:

  • व्यापार और व्यवसाय में लगे हैं और सफलता चाहते हैं
  • बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि की इच्छा रखते हैं
  • विघ्न और बाधाओं से परेशान हैं
  • मानसिक तनाव और चिंता से मुक्ति चाहते हैं
  • राहु की महादशा या अंतर्दशा से गुजर रहे हैं
  • नए कार्य की शुरुआत करने जा रहे हैं

छात्र, व्यापारी, नौकरीपेशा और गृहिणियां सभी इसे धारण कर सकते हैं। यह रुद्राक्ष सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है।

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किस दिन धारण करें?

8 मुखी रुद्राक्ष को बुधवार या गुरुवार के दिन धारण करना सबसे शुभ माना जाता है। कुछ ज्योतिषी गणेश चतुर्थी के दिन या किसी भी शुभ मुहूर्त में इसे धारण करने की सलाह देते हैं। सूर्योदय के समय या प्रातःकाल का समय इसे पहनने के लिए सर्वोत्तम है।

कब धारण करें? (समय और मुहूर्त)

रुद्राक्ष धारण करने का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल सूर्योदय के समय है। ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले) में धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही रुद्राक्ष पहनना चाहिए।

धारण करने की विधि

  1. शुद्धिकरण: सर्वप्रथम रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध या शुद्ध जल से धोकर साफ करें।
  2. प्राण प्रतिष्ठा: रुद्राक्ष को भगवान शिव और गणेश जी के सामने रखें। धूप-दीप से पूजन करें।
  3. मंत्र जाप: “ॐ गं गणपतये नमः” या “ॐ हूं नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  4. धारण: दाहिने हाथ से रुद्राक्ष को गले या कलाई में धारण करें।

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धारण करने के नियम

  • रुद्राक्ष को लाल या काले धागे में पहनें, चांदी या सोने की चेन में भी पहन सकते हैं
  • धारण करने के बाद कम से कम 40 दिन तक निरंतर पहने रहें
  • स्नान के समय भी रुद्राक्ष पहने रह सकते हैं
  • सात्विक जीवनशैली अपनाएं और नकारात्मक विचारों से बचें
  • शराब, मांसाहार और अनैतिक कार्यों से दूर रहें
  • नियमित रूप से मंत्र जाप करते रहें

रख-रखाव और सावधानियां

रुद्राक्ष को हर 3-4 महीने में हल्के तेल (सरसों या नारियल) से साफ करें। इसे गंदगी और रासायनिक पदार्थों से बचाएं। यदि धागा टूट जाए तो तुरंत नया धागा डालकर पुनः धारण करें।

निष्कर्ष

8 मुखी रुद्राक्ष एक दिव्य वरदान है जो सही विधि से धारण करने पर जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित धारण करने से गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सफलता के द्वार खुलते हैं।

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Written By pmkkgems

Muskan Sain is a well-versed gemstone expert with over 8 years of experience in the field. She has received extensive training from a renowned gemological institute, which has equipped her with comprehensive knowledge and expertise in the identification, grading, and valuation of gemstones.

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