14 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, नुकसान, धारण करने के नियम

14 मुखी रुद्राक्ष को शास्त्रों में अत्यंत दुर्लभ, शक्तिशाली और दिव्य रुद्राक्ष माना गया है। इसे देवमणि भी कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान शिव के साथ-साथ हनुमान जी और शनि देव की विशेष कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 14 मुखी रुद्राक्ष आत्मबल, निर्णय क्षमता, साहस और आत्मविश्वास को सशक्त करता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो जीवन में बार-बार भ्रम, भय, अस्थिरता या निर्णय लेने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

हालाँकि इसके अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ बताए गए हैं, लेकिन 14 मुखी रुद्राक्ष के कुछ संभावित नुकसान भी हो सकते हैं यदि इसे बिना सही जानकारी, शुद्धिकरण या विधिवत मंत्र जाप के धारण किया जाए। गलत विधि से पहनने पर इसके प्रभाव उल्टे भी हो सकते हैं। इसलिए इसे धारण करने से पहले इसके धारण करने के नियम, शुद्धिकरण विधि, उपयुक्त मंत्र और सही दिन की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इस लेख में हम 14 मुखी रुद्राक्ष के फायदे, नुकसान और धारण करने के नियमों को विस्तार से समझेंगे, ताकि आप इसे सुरक्षित और प्रभावी रूप से धारण कर सकें।

14 मुखी रुद्राक्ष के फायदे: शिव के ‘महाशनि’ कवच की शक्ति और लाभ

हिंदू धर्म और अध्यात्म में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है, लेकिन 14 मुखी रुद्राक्ष को सबसे दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है। इसे साक्षात ‘देवमणि’ या ‘हनुमान स्वरूप’ कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह रुद्राक्ष भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उत्पन्न हुआ है, जो पहनने वाले को अजेय शक्ति और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।

यहाँ 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के कुछ अद्भुत और चमत्कारी लाभ दिए गए हैं:

1. शनि और मंगल दोष से मुक्ति

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 14 मुखी रुद्राक्ष पर शनि देव का आधिपत्य होता है। जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या मंगल दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष किसी वरदान से कम नहीं है। यह शनि के दुष्प्रभाव को कम कर जीवन में स्थिरता लाता है।

2. निर्णय लेने की क्षमता (Intuition Power)

इसे धारण करने से व्यक्ति की छठी इंद्री (Sixth Sense) जाग्रत होती है। यह आज्ञा चक्र को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति में भविष्य की घटनाओं का पूर्वाभास करने और सही समय पर सही निर्णय लेने की गजब की क्षमता विकसित होती है।

3. संकटों से रक्षा और निडरता

चूंकि यह भगवान हनुमान का स्वरूप माना जाता है, इसलिए यह पहनने वाले को भूत-प्रेत, बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है। यह आत्मविश्वास में वृद्धि करता है और मन से हर प्रकार के भय को जड़ से मिटा देता है।

4. स्वास्थ्य लाभ

स्वास्थ्य की दृष्टि से, 14 मुखी रुद्राक्ष मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के दर्द और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) से जुड़ी समस्याओं में राहत दिलाने में सहायक माना जाता है। यह मानसिक शांति प्रदान कर तनाव और डिप्रेशन को कम करने में मदद करता है।

5. सफलता और समृद्धि

व्यापारी, राजनेता और उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है। यह सोई हुई किस्मत को जगाने और जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलाने वाला माना जाता है।

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14 मुखी रुद्राक्ष के संभावित नुकसान

14 मुखी रुद्राक्ष को शनि ग्रह से जोड़ा जाता है और यह आध्यात्मिक उन्नति व सिद्धियाँ प्रदान करने वाला माना जाता। हालाँकि, कुछ विशेष परिस्थितियों और गलत उपयोग से इसके कुछ नुकसान भी देखे गए हैं मुख्य संभावित नुकसान:

गलत धारण विधि: इसे धारण करने की विशिष्ट विधि है। बिना उचित संस्कार या गुरु मंत्र के पहनने से लाभ के स्थान पर अशांति महसूस हो सकती है।

अनुकूलता की कमी: ज्योतिष के अनुसार, यदि जन्म कुंडली में शनि अशुभ प्रभाव में हों, तो बिना सलाह के इसे धारण करने से जीवन में अड़चनें आ सकती हैं।

शारीरिक प्रतिक्रिया: कुछ संवेदनशील व्यक्तियों को प्रारंभ में सिरदर्द, बेचैनी या नींद में खलल का अनुभव हो सकता है, क्योंकि यह शक्तिशाली ऊर्जा उत्पन्न करता है।

अशुद्धि का प्रभाव: नियमित सफाई और पूजन न करने पर इसकी ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष: 14 मुखी रुद्राक्ष एक शक्तिशाली आध्यात्मिक उपकरण है, लेकिन इसे किसी योग्य जानकार की सलाह से, उचित विधि से ही धारण करना चाहिए। व्यक्तिगत अनुकूलता सुनिश्चित कर लेना आवश्यक है।

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14 मुखी रुद्राक्ष किसे धारण करना चाहिए

14 मुखी रुद्राक्ष हर किसी के लिए नहीं है, लेकिन कुछ विशेष लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। यदि आप शनि की साढ़ेसाती या दशा से प्रभावित हैं, तो यह आपके लिए आदर्श है। व्यापारी, नेता, छात्र और वे लोग जो जीवन में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें यह धारण करना चाहिए। जो लोग साहस की कमी महसूस करते हैं या निर्णय लेने में असमर्थ हैं, उनके लिए यह रुद्राक्ष रामबाण है। आध्यात्मिक साधकों, योगियों और वे जो जीवन के गहन उद्देश्य को जानना चाहते हैं, उन्हें भी यह पहनना चाहिए। हालांकि, बच्चों या कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को ज्योतिषी की सलाह से ही धारण करना चाहिए। कुल मिलाकर, यह उन लोगों के लिए है जो जीवन में सुरक्षा, सफलता और आध्यात्मिक विकास चाहते हैं।

14 मुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें

14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि सरल लेकिन महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, रुद्राक्ष को गंगा जल या कच्चे दूध से धोकर शुद्ध करें। फिर, शिव मंदिर या घर के पूजा स्थल पर बैठकर “ॐ ह्रीं नमः” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद, इसे लाल धागे, सोने या चांदी के तार में पिरोकर गले में या दाहिने हाथ पर धारण करें। धारण करते समय सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें और मानसिक रूप से शुद्ध रहें। यदि संभव हो, तो ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) में धारण करें। इस विधि से रुद्राक्ष की ऊर्जा सक्रिय होती है और पूर्ण लाभ मिलता है।

14 मुखी रुद्राक्ष किस दिन धारण करें

14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने का सबसे शुभ दिन मंगलवार है, क्योंकि यह हनुमान जी का दिन है और मंगल ग्रह से जुड़ा है। सुबह 5-7 बजे के बीच धारण करना सर्वोत्तम है। यदि मंगलवार संभव न हो, तो सोमवार को भी धारण किया जा सकता है, जो शिव जी का दिन है। सावन मास, पूर्णिमा या अक्षय तृतीया जैसे शुभ मुहूर्त में धारण करने से विशेष फल मिलता है। ध्यान रखें, धारण से पहले ज्योतिषीय सलाह लें ताकि ग्रहों की स्थिति अनुकूल हो।

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धारण करने के नियम और सावधानियां

रुद्राक्ष धारण करने के बाद कुछ नियमों का पालन जरूरी है। इसे पहनकर मांसाहार, शराब या तंबाकू का सेवन न करें। यौन संबंध या अंतिम संस्कार जैसे अवसरों पर इसे उतार दें। हमेशा साफ हाथों से स्पर्श करें और नियमित रूप से इसे गंगा जल से साफ करें। यदि टूट जाए, तो नया धारण करें। इन नियमों से रुद्राक्ष की शक्ति बनी रहती है।

निष्कर्ष में, 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के नियमों का पालन करके आप जीवन में अपार सफलता और शांति प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप असली रुद्राक्ष खरीदना चाहते हैं, तो प्रमाणित विक्रेताओं से ही लें। अधिक जानकारी के लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

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Written By pmkkgems

Muskan Sain is a well-versed gemstone expert with over 8 years of experience in the field. She has received extensive training from a renowned gemological institute, which has equipped her with comprehensive knowledge and expertise in the identification, grading, and valuation of gemstones.

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